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कागजी घोषणाओं का पुलिंदा बना बजट, हनुमानगढ़ के हर वर्ग को किया निराश : सुरेन्द्र दादरी

 कागजी घोषणाओं का पुलिंदा बना बजट, हनुमानगढ़ के हर वर्ग को किया निराश : सुरेन्द्र दादरी

- डीसीसी के पूर्व अध्यक्ष बोले-पिछले वादों का हिसाब दिए बिना नई घोषणाओं की भरमार




हनुमानगढ़। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र दादरी ने वित्त मंत्री दीया कुमारी की ओर से बुधवार को पेश किए गए बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे हनुमानगढ़ के हर वर्ग को निराश करने वाला बजट बताया है। दादरी ने कि यह बजट प्रदेशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। इस बजट में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए व मजदूरों, मध्यम वर्ग, युवाओं व बेरोजगारी उन्मूलन के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। पिछले बजट में की गई घोषणाएं धरातल पर नहीं उतरी और नई घोषणाएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी सरकार हो, उसे नए बजट में घोषणाएं करने से पहले पिछले बजट में किए गए वायदों के बारे में बताना चाहिए कि इस जिले के लिए यह वायदा किया गया और यह वादा इस वजह से पूरा नहीं हुआ। इस सरकार की ओर से भी पिछले बजट में की गई अधिकतर घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पाईं। इस सरकार ने कांग्रेस की जनकल्याणकारी नीतियों को कमजोर करने, नाम बदलने या बंद करने के अलावा कोई काम नहीं किया। न तो डिग्गियों का अनुदान किसानों को मिल रहा है और न ही पेंशनर्स को पेंशन मिल रही है। नरेगा को बंद करने की तैयारी की जा रही है। जिला मुख्यालय पर बहने वाले घग्घर नाले के संबंध में पिछले बजट में 350 करोड़ रुपए की घोषणा दी गई थी लेकिन आज तक उसकी डीपीआर नहीं बन पाई। कोहला-नवां बाइपास के लिए 200 करोड़ रुपए की घोषणा की गई थी। लेकिन अब उस बाइपास का मामला उलझाया जा रहा है। दादरी ने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी बजट केवल कागजों तक सीमित घोषणाओं का पुलिंदा बनकर रह गया है। बजट को लेकर प्रदेश के किसानों, युवाओं, व्यापारियों, कर्मचारियों और आमजन को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन प्रस्तुत प्रावधानों में जमीनी स्तर पर राहत देने वाली कोई ठोस और प्रभावी योजना नजर नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विकास और रोजगार के नाम पर केवल आंकड़ों और घोषणाओं का सहारा लिया है, जबकि आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का हर वर्ग बजट से राहत और ठोस निर्णयों की अपेक्षा कर रहा था, लेकिन यह उम्मीद भी निराशा में बदल गई। दादरी ने सरकार से मांग की कि घोषणाओं को धरातल पर उतारने की स्पष्ट समयसीमा और पारदर्शी कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए, ताकि जनता को वास्तविक लाभ मिल सके। सुरेन्द्र दादरी ने सुझाव दिया कि बजट पूरे राजस्थान के लिए नहीं हो, बल्कि जिले के अनुसार बजट बनना चाहिए। क्योंकि सभी जिलों की अलग-अलग जरूरतें हो सकती हैं। आगामी बजट से पहले प्रदेश सरकार इस तरह की तैयारी करे। अंत में दादरी ने कहा कि प्रदेशहित में ठोस नीतिगत निर्णय और ईमानदार क्रियान्वयन ही वास्तविक विकास का आधार बन सकते हैं, केवल घोषणाओं से नहीं।

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