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भाखड़ा क्षेत्र के हजारों किसानों ने हनुमानगढ़ में सिंचाई विभाग कार्यालय के सामने भरी हुंकार

 भाखड़ा क्षेत्र के हजारों किसानों ने हनुमानगढ़ में सिंचाई विभाग कार्यालय के सामने भरी हुंकार


4 मई से भाखड़ा सिंचाई क्षेत्र में 1200 क्यूसेक पानी देने पर बनी सहमति।



हनुमानगढ़। भाखड़ा प्रणाली में समझौते अनुसार 1200 क्यूसेक सिंचाई पानी देने की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले भाखड़ा के हजारों किसानों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सिंचाई विभाग पर महापड़ाव डाला दिया। महापड़ाव सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चला और प्रशासन के झुकने के बाद महापड़ाव समाप्त हुआ। दो दौर की वार्ता के बाद किसान नेताओं व प्रशासन की सहमति बनी। पहली समझौता वार्ता दोपहर 2 बजे के करीब हुई जो बेबुनियाद रही जिसके पश्चात शाम 4 बजे पुनः समझौता वार्ता हुई जिसमें प्रतिनिधि मण्डल में किसान नेता संतवीर सिंह मोहनपुरा,किसान नेता डॉ सौरभ राठौड़ हनुमानगढ़,रणजीत सिंह राजू, राय सिंह जाखड़,रेशम सिंह माणुका ,अवतार सिंह बराड़, भाखड़ा प्रोजेक्ट चेयरमैन मनप्रीत सिंह सरां, गंग कैनाल प्रोजेक्ट चेयरमैन हरविंदर सिंह गिल, गगनदीप सिंह,प्रगट सिंह भगवानगढ़,रमनदीप कौर,बीकेयू श्रीगंगानगर के अध्यक्ष संदीप सिंह,रणदीप सिंह भंगू,राजेश जाखड़,महेंद्र कड़वा,गैलेक्सी बराड धनदेव सिंह सहित अन्य कई किसान प्रतिनिधि शामिल थे। समझौता वार्ता में तय हुआ कि 4 मई तक किसानों को 1200 क्यूसेक पानी दिया जायेगा जिसके पश्चात महापड़ाव समाप्त हुआ। महापड़ाव को संबोधित करते हुए किसान नेता सतवीर सिंह, रणजीत सिंह राजू,किसान नेता डॉ. सौरभ राठौड़, किसान नेता राय सिंह जाखड़ बीकेयू जिला अध्यक्ष रेशम सिंह मानुका, ने कहा कि यह जीत केवल किसानों की एकता की जीत है। उन्होने कहा कि किसानों की एकजुटता का परिणाम है कि हर बार प्रशासन को किसानों के हौसले के आगे झुकना पड़ता है और किसानों को उनके हक का पूरा पानी देना पड़ता है। उन्होने कहा कि जब तक किसानों की यह एकता कायम है किसान अपना हक सदैव लेते रहेगे अगर प्रशासन आराम से देगा तो ठीक अन्यथा संघर्ष का रास्ता अपनाकर अपने हक का पूरा पानी लेगे। वार्ता में सिंचाई विभाग के चीफ अमरजीत मेहरडा हनुमानगढ़ एसडीएम अवि गर्ग हनुमानगढ़ पुलिस उपाधीक्षक रमेश माचरा सहित सिंचाई महकमे के अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा। महापड़ाव में हजारों की संख्या में किसान पहुंचे।

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