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मुंहपका-खुरपका रोग से बचाव हेतु टीकाकरण का सातवां चरण 15 मार्च से आरंभ

 मुंहपका-खुरपका रोग से बचाव हेतु टीकाकरण का सातवां चरण 15 मार्च से आरंभ





श्रीगंगानगर, 12 मार्च। श्रीगंगानगर जिले में गौ तथा भैंस वंश के पशुओं में मुंहपका-खुरपका रोग से बचाव हेतु टीकाकरण का सातवां चरण 15 मार्च 2026 से प्रारंभ किया जा रहा है।
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अरविंद मित्तल ने बताया कि 20वीं पशुगणना के अनुरूप जिले की गौ तथा भैंस वंश को एफएमडी टीकाकरण की आपूर्ति जिले को प्राप्त हो गई है तथा ब्लॉक नोडल कार्यालयों के माध्यम से समस्त संस्थाओं को आवंटित कर दी गई है। साथ ही कूल बॉक्स तथा टैग तथा सिरिंज नीडल भी उपलब्ध करवाए गए हैं।
टीकाकरण हेतु टीम प्रभारियों का गठन किया जाकर ब्लॉक स्तर पर ग्रामवार/पंचायतवार/टीकाकर्मियों को लक्ष्य आवंटित कर प्रतिदिन अभियान चलाकर संपूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
टीकाकर्मी द्वारा प्रतिदिन 50 पशुओं का टीकाकरण कर पशु का टैग तथा टीकाकरण डेटा को उसी दिन भारत पशुधन एप की अपनी आईडी में इंद्राज करना होगा।
समस्त गौ तथा भैंस पालकों से अनुरोध है कि पशुपालन विभाग से टीकाकरण हेतु आए टीकाकर्मियों को टीकाकरण में सहयोग करें ताकि आपका पशु रोगमुक्त रहे तथा साथ ही मांगे जाने पर आधार नंबर, मोबाइल नंबर तथा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया ओटीपी बताएं।
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बाहर से आने वाले कार्मिक, किरायेदार, मजदूरों का पुलिस चरित्र सत्यापन करवाना आवश्यक
जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किये आदेश
श्रीगंगानगर, 12 मार्च। जिले में स्थित हाॅस्टल, पीजी, ढाबे, सराय, धर्मशाला में बाहर से आकर कुछ असामाजिक तत्व या संदिग्ध व्यक्ति रहने लग जाते हैं। इसी प्रकार घरेलू नौकर, किरायेदार, विभिन्न कारखानों, ईंट भट्टों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों आदि पर ऐसे लोग आकर कार्य करने लग जाते हैं। हाॅस्टल, पीजी, ढाबे, धर्मशाला, सराय मालिकों, मकान मालिकों, विभिन्न कारखानों, ईंट भट्टों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधकों द्वारा इनका पुलिस चरित्र सत्यापन नहीं करवाया जाता है। ऐसे असामाजिक तत्व, संदिग्ध व्यक्तियों द्वारा कानून व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। हाॅस्टल, पीजी, ढाबे, धर्मशाला, सराय मालिकों, मकान मालिकों द्वारा इनके यहां ठहरने वालों एवं विभिन्न कारखानों, ईंट भट्टों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधकों को अपने कार्मिकों, मजदूरों का पुलिस चरित्र सत्यापन करवाना अतिआवश्यक है।
जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डाॅ. मंजू द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए समस्त जिला श्रीगंगानगर में तुरन्त प्रभाव से प्रतिबंध लगाया है। इसके अनुसार जिले में स्थित हाॅस्टल, पीजी, ढाबे, सराय, धर्मशाला में बाहर से आकर व्यक्ति बिना पुलिस चरित्र सत्यापन के नहीं रह सकेंगे। इसी प्रकार घरेलू नौकर, किरायेदार, विभिन्न कारखानों, ईंट भट्टों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों आदि पर बाहर से ऐसे लोग आकर बिना पुलिस चरित्र सत्यापन के कार्य नहीं कर सकेंगे। समस्त हाॅस्टल, पीजी, ढाबे, धर्मशाला, सराय मालिकों, मकान मालिकों, विभिन्न कारखानों, ईंट भट्टों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधकों को अपने कार्मिकों, मजदूरों का पुलिस चरित्र सत्यापन करवाया जाना अनिवार्य होगा।
इस आदेश का उल्लंघन करने पर पुलिस प्रशासन अथवा उपखण्ड अधिकारी द्वारा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दण्डित कराने की कार्यवाही की जायेगी। यह आदेश आगामी दो माह की अवधि तक प्रभावी रहेगा।
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टांटिया यूनिवर्सिटी के दंत चिकित्सा विभाग में नशा मुक्ति कार्यशाला का आयोजन
श्रीगंगानगर, 12 मार्च। जिला कलक्टर डॉ. मंजू एवं जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में जारी नशा मुक्त श्रीगंगानगर अभियान के तहत टांटिया यूनिवर्सिटी के दंत चिकित्सा विभाग में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नशा मुक्ति जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं और भविष्य के डॉक्टरों को नशे के खिलाफ समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के श्री विक्रम ज्याणी ने कहा कि आप सभी डॉक्टर बनने जा रहे हैं और यह सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि किसी परिवार का सपना होता है। एक डॉक्टर सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं करता, बल्कि समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की जिम्मेदारी भी निभाता है। उन्होंने कहा कि नशे की ओर बढ़ने वाला पहला कदम ही सबसे खतरनाक होता है और अगर वही कदम समय रहते रोक दिया जाए तो जिंदगी को बर्बादी से बचाया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए कहा कि अगर आप जागरूक हैं तो आप अपने साथ-साथ कई जिंदगियों को भी इस दलदल में गिरने से बचा सकते हैं। श्री विक्रम ज्याणी ने कहा कि जागरूकता वह पहला कदम है, जो बदलाव की ओर ले जाता हैए और आप सभी उस बदलाव के वाहक बन सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रिंसिपल डॉ. राहुल, वाइस प्रिंसिपल डॉ. नवनीत कथूरिया, डॉ. गगन, डॉ. नवरीत, डाॅ. इंदु मौजूद रहे। विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
साथ ही यह भी बताया गया कि किस प्रकार नशा धीरे-धीरे व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य को कमजोर कर देता है। विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे अपने आसपास के लोगों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। वर्कशॉप के अंत में विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और समाज में नशा मुक्ति के संदेश को आगे बढ़ाएंगे। 

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