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कृषि में नवाचार और आयुर्वेद में अपार संभावनाएं: आईएएस देवाराम सैनी बेबी हैप्पी

 कृषि में नवाचार और आयुर्वेद में अपार संभावनाएं: आईएएस देवाराम सैनी

बेबी हैप्पी मॉडर्न आर्युेदिक कॉलेज में आईएएस देवाराम सैनी का अभिनंदन




हनुमानगढ़. जिला मुख्यालय स्थित बेबी हैप्पी हैप्पी मॉडर्न आयुर्वेदिक कॉलेज में कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के कुल सचिव एवं सीनियर आईएएस देवाराम सैनी का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

आईएएस देवाराम सैनी ने कहा कि कृषि आज परंपरा और तकनीक के संगम के दौर से गुजर रही है। बदलते समय में केवल परंपरागत तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नवाचार, शोध और आधुनिक तकनीक को अपनाना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और किसान हितैषी तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, ताकि किसानों की आय बढ़े और कृषि टिकाऊ बन सके।

आईएएस सैनी ने मानव जीवन में आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण शैली है। आज जब आधुनिक जीवनशैली के कारण नई-नई बीमारियां सामने आ रही हैं, तब आयुर्वेद की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि आयुर्वेद के प्रति लोगों का भरोसा और क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में आयुर्वेदिक चिकित्सा, अनुसंधान, औषधि निर्माण और वेलनेस सेक्टर में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। ऐसे में युवाओं को प्रोफेशनल कोर्सेज की ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने बेबी हैप्पी एजुकेशन ग्रुप की सराहना करते हुए कहा कि यह समूह शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण संस्थान विकसित कर समाज को सही दिशा देने का कार्य कर रहा है। ग्रामीण और शहरी युवाओं को एक समान अवसर उपलब्ध कराना किसी भी शैक्षणिक संस्था की बड़ी उपलब्धि होती है, और यह समूह इस कसौटी पर खरा उतरता दिखाई देता है।

बेबी हैप्पी एजुकेशन ग्रुप के डायरेक्टर तरुण विजय ने कहा कि बेबी हैप्पी एजुकेशन ग्रुप का उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख, संस्कारयुक्त और समाज के प्रति उत्तरदायी बनाना है। आयुर्वेदिक कॉलेज की स्थापना इसी सोच का परिणाम है, ताकि क्षेत्र के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है और इसे आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वय कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। बेबी हैप्पी एजुकेशन ग्रुप इसी दिशा में सतत प्रयास कर रहा है।

ग्रुप के चेयरमैन आशीष विजय ने कहा कि आज के समय में शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रह गई है। विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान, अनुसंधान की प्रवृत्ति और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। बेबी हैप्पी एजुकेेशन ग्रुप इसी सोच के साथ काम कर रहा है।

वाइस चेयरमैन रौनक विजय ने कहा कि करियर चयन में केवल ट्रेंड के पीछे भागना समझदारी नहीं है। जिस क्षेत्र में रुचि, समर्पण और सेवा की भावना हो, वहीं दीर्घकालीन सफलता मिलती है। आयुर्वेद ऐसा ही क्षेत्र है, जिसमें सेवा, सम्मान और स्थायित्व तीनों मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि संस्था विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं, अनुभवी फैकल्टी और शोध के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में सीनियर सर्जन डॉ. बीके चावला, पूर्व लोक अभियोजक दिनेश दाधीच, बाल कल्याण समिति सदस्य विजय सिंह चौहान, जिला जन अभाव निराकरण समिति के पूर्व सदस्य मनोज बड़सीवाल, कॉलेज प्रशासक परमानंद सैनी, उप प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार शर्मा, बी.एड कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संतोष चौधरी, डॉ. केंद्रप्रताप कौशिक,कुलभूषण जिंदल, लक्की सिंधी, कपिल गोयल, इंद्र सिंधी, साहिल खुंगर सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने आईएएस देवाराम सैनी के विचारों को प्रेरणादायी बताते हुए शिक्षा, कृषि और आयुर्वेद के समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।

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